Swami Vivekananda Biography | स्वामी विवेकानन्द जीवनी

Swami Vivekananda Biography in Hindi – स्वामी विवेक नन्द की जीवनी, गुरू प्रेम, शिकागो भाषण और उनके सिद्धांतों को जानने के लिए यह पोस्ट जरूर पढ़े.

स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विश्व विख्यात और प्रभावी आध्यात्मिक गुरू थे जिनके विचारों और सिद्धांतों को पढ़कर लोग उत्साह और सदबुद्धि से भर जाते हैं. स्वामी विवेकानन्द का वास्तविक नाम “नरेन्द्र नाथ दत्त” था. विश्व धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए “सनातन धर्म” पर बहुत ही अतुल्य भाषण दिया था. यह धर्म सम्मेलन 1893 में, शिकागो (अमेरिका) में हुआ था. विवेकानन्द के गुरू “रामकृष्णा परमहंस” थे. स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो वर्तमान समय में भी उनके विचारों और सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करते हैं.

Swami Vivekananda Biography | स्वामी विवेकनन्द की जीवनी

नाम – स्वामी विवेकानन्द ( बचपन का नाम – नरेंद्रनाथ दत्त)
जन्म – 12 जनवरी 1863
जन्म स्थान – कलकत्ता
मृत्यु – 4 जुलाई 1909 (उम्र 46)
पिता – विश्वनाथ दत्त
माता – भुवनेश्वरी देवी
दादा – दुर्गाचरण दत्ता
गुरु – श्री रामकृष्णा परमहंस
दर्शन – आधुनिक वेदान्त, राजयोग
प्रसिद्धि कथन – “उठो, जागो और तब तक नही रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए.

स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था. स्वामी विवेकानन्द के माता पिता के धार्मिक विचारों का छाप इनमें बचपन में ही दिखने लगा था. ये बचपन में कुशाग्र बुद्धि के थे और नटखट भी थे. अपने साथी बच्चो के साथ खूब शरारत करते थे. कभी-कभी अपने गुरू जनों के साथ भी शरारत कर देते थे. उनकी माता जी को पुराण, रामायण, महाभारत की कथाएं सुनने का बड़ा शौक था. उनके घर में आध्यात्मिक एवं धार्मिक वातावरण बना रहता था जिसका प्रभाव बालक नरेंद्र के मन पर पड़ता गया और उनकी भी रुचि धार्मिक किया कलापों में बढ़ने लगी. बचपन में ही ईश्वर को जानने और देखने की लालसा ने जन्म ले लिया था. कभी-कभी माता-पिता और कथावाचक से ईश्वर के बारे में ऐसे प्रश्न कर लेते थे कि जिनका उत्तर देना मुश्किल हो जाता था.

Swami Vivekananda’s education | स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा

नरेंद्र एक प्रतिभावान छात्र थे. उनकी बुद्धि बहुत कुशाग्र थी, वो जो भी एक बार सुन लेंते या पढ़ लेते वह उन्हें कंठस्थ हो जाता था. प्रेसिडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर दाखिला लिया. वे दर्शन, धर्म, इतिहास, सामजिक विज्ञान, कला और साहित्य के विषयों को पढने में उनकी रुचि काफी थी. इन्होने ने अपनी रुचि के कारण वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों का गहन अध्ययन किया और 1884 में कला स्नातक की डिग्री प्राप्त कर ली. ये विदेशी दार्शनिको से काफी प्रभावति थे इसलिए उनकी जीवनी और उनके लिखे किताबों का गहन अध्ययन किया.

स्वामी विवेकानन्द अपने गुरू रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे और उनका मन भी अध्यात्म ही लगता था. विवेकानन्द ने अपने गुरू से सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं इसलिए मानव जाती की सेवा द्वारा परमात्मा की सेवा की जा सकती हैं.

Swami Vivekananda’s allegiance to his master | स्वामी विवेकानन्द का गुरू के प्रति निष्ठा

एक बार एक शिष्य ने रामकृष्ण परमहंस के सेवा में घृणा और निष्क्रियता को देखकर उन्हें अच्छा नही लगा और वो खुद गुरू की सेवा में लग गये और अपने गुरू भाई को दिखाया कि गुरू की सेवा किस श्रद्धा के साथ करनी चाहिए. गुरू के बिस्तर के पास पड़े रक्त, कफ़ से भरी थूकदानी उठाकर फेकते थे. उनकी सेवा में इतने तल्लीन हो जाते थे कि अपना भोजन भी भूल जाते थे. गुरू के पति ऐसी अनन्य भक्ति और निष्ठां का ही प्रताप था कि वे अपने गुरू के शरीर और उसके दिव्यतम आदर्शो की उत्तम सेवा कर सके. विवेकानन्द ने अपने जीवन को अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर दिया था.

Swami Vivekananda’s Chicago speech | स्वामी विवेकनन्द का शिकागों भाषण

इसमें शिकागों के भाषण के महत्वपूर्ण अंश दिए गये हैं जो आपको बहुत ही पसंद आयेंगे. भाषण देने में विनम्रता का बड़ा ही महत्व होता हैं.

स्वामी विवेकानन्द को प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत “मेरे अमेरिकी भाइयो एवं बहनों” के साथ करने के लिये जाना जाता है. उनके संबोधन के इन कुछ शब्दों ने सबका दिल जीत लिया था.

मेरे अमरीकी भाइयो और बहनो!!!

आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया हैं उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा हैं. संसार में संन्यासियों की सबसे प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ; धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ; और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ.

भाषण में बोले गये एक श्लोक का अर्थ हैं –

“जैसे विभिन्न नदियाँ भिन्न भिन्न स्रोतों से निकलकर समुद्र में मिल जाती हैं उसी प्रकार हे प्रभु!! भिन्न भिन्न रुचि के अनुसार विभिन्न टेढ़े-मेढ़े अथवा सीधे रास्ते से जानेवाले लोग अन्त में तुझमें ही आकर मिल जाते हैं”

Swami Vivekananda’s education philosophy and theories | स्वामी विवेकानन्द के शिक्षा दर्शन और सिद्धांत

  1. शिक्षा का मुख्य उद्देश्य शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हैं.
  2. शिक्षा ऐसी हो जिसमे बच्चे के चरित्र का निर्माण हो, बुद्धि का विकास हो और आत्मनिर्भर बने.
  3. लड़के और लड़कियों को समान शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए.
  4. धार्मिक शिक्षा, पुस्तकों के द्वारा न देकर सस्कारों के द्वारा देनी चाहिए.
  5. शिक्षा में व्यवहारिक और अध्यात्मिक दोनों प्रकार के विषयों को स्थान देना चाहिए.
  6. शिक्षा, गुरू से ही प्राप्त की जा सकती हैं.
  7. शिक्षक और छात्र का सम्बन्ध निकट का होना चाहिए.
  8. सभी शिक्षित हो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए.
  9. देश की आर्थिक प्रगति के लिए तकनीकी शिक्षा जरूरी हैं.
  10. मानवीय और राष्ट्रीय शिक्षा परिवार से ही शुरू करनी चाहिए.

Swami Vivekananda Quotes | स्वामी विवेकनन्द कोट्स

  1. मनुष्य स्वयं के भाग्य का निर्माता हैं.
  2. उठो, जागो और तक तक मत रूको…जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए…!!!
  3. सत्य एक हजार अलग तरीको से कहा जा सकता हैं, फिर भी हर एक सच हो सकता हैं.
  4. खुद को कमजोर समझना ही सबसे बड़ा पाप हैं.
  5. संभव की सीमा जानने का केवल एक तरीका हैं असम्भव से भी आगे निकल जाना.
  6. जो अग्नि हमे गर्मी देती हैं, हमें नष्ट भी कर सकती हैं. यह अग्नि का दोष नही हैं.