Motivational Poem | उत्साहवर्धक कविता

Best Motivational Poem in Hindi – इन बेहतरीन मोटिवेशनल कविता को जरूर पढ़े. हृदय में उत्साह और उमंग ही जीवन को ऊँचे आयाम पर ले जाता हैं. कभी-२ जीवन में, लोग बहुत उदास हो जाते हैं और हरा हुआ महसूस करते हैं. अक्सर ऐसा वक्त हर व्यक्ति के जीवन में आता हैं. ऐसे वक्त में, हमे अच्छी किताबे और अच्छी चीजे ही पढनी चाहिए जिससे हम फिर उत्साहित हो उठे और फिर से जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तत्पर हो जाये. इस पोस्ट में दी गई Motivational Poem आपको बहुत उत्साहित करेंगे.

Motivational Poem | उत्साहवर्धक कविता

दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमे भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पांच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम.
हम वही ख़ुशी से खायेंगे,
परिजन पर असि न उठाएंगे.

दुर्योधन वह भी दे न सका, आशीष समाज का ले न सका,
उलटे, हरि को बाधने चला, जो था असाध्य, साधने चला.
जब नाश मनुज पर छाता हैं ,
पहले विवेक मर जाता हैं.

हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप विस्तार किया,
डगमग डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित हो कर बोले.
‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे.

यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल.
अमरत्व फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें।

रामधारी सिंह दिनकर



लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

सोहनलाल द्विवेदी



हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए.
आज यह दीवार, पर्दों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी की ये बुनियाद हिलनी चाहिए.
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए.
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.
मेरे सीने में नही तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए.

दुष्यंत कुमार



कोशिश कर , हल निकलेगा,
आज नही तो, कल निकलेगा.
अर्जुन सा लक्ष्य रख, निशाना लगा,
मरुस्थल से भी फिर, जल निकलेगा.
मेहनत कर, पौधों को पानी दे,
बंजर में भी फिर, फल निकलेगा .
ताक़त जुटा, हिम्मत को आग दे,
फौलाद का भी, बल निकलेगा.
सीने में उम्मीदों को, ज़िंदा रख,
समन्दर से भी, गंगाजल निकलेगा.
कोशिशें जारी रख, कुछ कर ग़ुज़रने की,
जो कुछ थमा-थमा है, चल निकलेगा.
कोशिश कर, हल निकलेगा,
आज नहीं तो, कल निकलगा.



पीड़ा रस का स्वाद जो चखना ज़रूरी है अगर
दीप एक आशा का भी रखना ज़रूरी है मगर
कार्य संभव हो न हो मैं यत्न कैसे छोड़ दूँ
है चुनौती सामने मैं मुख को कैसे मोड़ लूँ
मैं पथिक हूँ पथ मेरा बस कर्म सिखलाता मुझे
सत्य जो ह्रदय में है वो ध्येय दिखलाता मुझे
माना शक्ति है भुजा मैं ज्ञात मुझको है मगर
मैं धरा पर उस गगन को उतार तो सकता नहीं
किंतु हूँ मानव मैं फिर भी, हार तो सकता नहीं
आरम्भ करने से ही पहले डर गया जो राह से
फ़र्क़ क्या पड़ता है उसके स्वप्न से या चाह से
हों घने जंगल मध्य में या भले ही सौ गाँव हों
गर्व हो उस मोड़ को भी जिस पे मेरे पाँव हों
स्वप्न मेरे हैं तो मुझको ही उठाना भार है
हूँ किनारे पर खड़ा और लक्ष्य भी उस पार है
मैं समंदर की लहर को मार तो सकता नहीं
किंतु हूँ मानव मैं फिर भी, हार तो सकता नहीं



तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

आज सिन्धु ने विष उगला है
लहरों का यौवन मचला है
आज हृदय में और सिन्धु में
साथ उठा है ज्वार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

लहरों के स्वर में कुछ बोलो
इस अंधड में साहस तोलो
कभी-कभी मिलता जीवन में
तूफानों का प्यार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

यह असीम, निज सीमा जाने
सागर भी तो यह पहचाने
मिट्टी के पुतले मानव ने
कभी न मानी हार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

शिवमंगल सिंह “सुमन”