भारतीय राजनीति

भारत में राजनीति भारतीय संविधान के अनुसार होती हैं क्योकि भारत एक संघीय संसदीय लोकतांत्रिक गणराज्य हैं. भारत दोहरी राजनीति प्रणाली का अनुसरण करता हैं यानि दो सरकार जिसमें केंद्र और राज्य आते हैं. संविधान केंद्र और राज्य सरकारों की संस्था शक्तियों और सीमओं को परिभाषित करता हैं.

भारत को राजनीतिक दृष्टि से देखा जाय तो इसमें इतनी कमियाँ मिलेंगी जिसकी कल्पना करना एक साधारण दिमाग के बस की बात नही हैं. भारत में जब भी राजनीति से प्रेरित या समाज सुधार से सम्बंधित कोई पार्टी या संस्था बनती हैं तो उसका प्रथम लक्ष्य समाज कल्याण और मानव हित होना चाहिए पर यहाँ पर केवल स्वयं का हित और स्वयं का कल्याण ही सर्वोपरि रखा जाता हैं.

भारतीय राजनीति में नये विचारों और युवाओं का आना बहुत जरूरी हैं, राजनीति के प्रति प्रत्येक भारतीय को जागरूक होना चाहिए. इस पोस्ट में भारतीय राजनीति की अच्छाईयों और बुराइयों पर चर्चा करेंगे. यदि आप राजनीति में जाना चाहते हैं तो इस पोस्ट को जरूर पढ़े.

भारतीय राजनीति में कमियां (Drawbacks in Indian Politics)

भारतीय राजनीति में बहुत सारी कमियाँ हैं जिसको जानना और समझना उतना ही जरूरी हैं, जिस प्रकार शरीर में रोग होने पर उसे जानना और उसका इलाज बहुत जरूरी होता हैं.

भ्रष्टाचार (Corruption)

यदि हम भ्रष्टाचार का नाम ले तो कहीं न कहीं दिमाग में राजनीति और सरकारी नौकर का चित्र अपने आप छप जाता हैं. कुछ प्रतिशत लोगो को छोड़ दिया जाय तो ऐसा लगता हैं कि सभी लोग भ्रष्ट हैं. भ्रष्टाचार के भी अपने-अपने तरीके होते हैं जो राजनीतिक लोगो से लेकर बड़े अफसर तक इसमें लिप्त होते हैं. सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार शिक्षा और स्वास्थ के क्षेत्र में हैं. यहाँ सरकारी स्कूल और अस्पताल सिर्फ नाम मात्र के हैं.

ब्लैक मनी छुपाने और ब्लैक मनी कमाने का सबसे अच्छा जरिया शिक्षा हैं. भारतीय प्राइवेट स्कूल फीस से कम, नकल कराके ज्यादा पैसा कमाते हैं. छात्र और छात्र के माँ बाप भी ख़ुशी-ख़ुशी पैसे खर्च करते हैं. बाद में नौकरी नही मिलती लड़का या तो मानसिक रूप से बीमार हो जाता हैं या तो आत्महत्या कर लेता हैं. नेता मनमानी तरीको से इन स्कूलों के पूंजीपतियों को कमीशन पर फण्ड देते हैं. थोड़ा सी महँगाई बढ़ जाए तो रोने लगते हैं और रिश्वत देने के लिए तैयार रहते हैं.

स्वास्थ इसमें तो डॉक्टर साहब को भगवान् ही बना दिया गया हैं और डॉक्टर साहब सरकारी अस्पतालों में कम और अपने निजी या प्राइवेट अस्पताल में ज्यादा मिलते हैं, फिर डॉक्टर साहब जिन्हें हम भगवान् कहते हैं वो दवा की कंपनियों से कमीशन लेकर गरीब मरीजों को महँगी दवाइयाँ ही लिखते हैं. इसमें बुराई ही क्या हैं डॉक्टर साहब को भगवान् हमने ही बनाया हैं.

ये तो सिर्फ दो बड़े सेक्टर है और मैंने बहुत थोड़ी से बात उनके बारे में की हैं अगर कोई भ्रष्टाचार का विश्लेषण करे तो शायद कोई बहुत बड़ा ग्रन्थ लिख दे.

अंधभक्ति (Blindfold)

अंधभक्ति आजके राजनीति की सबसे बड़ी समस्या हैं, यदि सही आकड़े रखे जाए तो पूरा भारत किसी न किसी पार्टी को सपोर्ट करता हैं बिना यह सोचे समझे कि वह क्या अच्छा कर रहा हैं? वह क्या बुरा कर रहा हैं? युवा जिस पार्टी को फॉलो करते हैं उसके खिलाफ एक शब्द नही सुन सकते. यूँ कहा जाय कि उनकी अपनी कोई विचार धारा ही नही हैं. वही राजनीति अच्छी और सच्ची होती हैं जो केवल और केवल देश हित में किया जाय.

अंधभक्ति के कारण

  1. राजनीति में जाति-पाति और धर्म के नाम पर भ्रमित करना और युवाओ को अंधभक्ति के लिए मजबूर करना.
  2. धार्मिक उन्माद फैलाना और पढ़े-लिखे लोगो को अपना लक्ष्य बनाना.
  3. अंधभक्ति का एक मुख्य कारण लालच भी हैं, लोग उसी पार्टी से जुड़ना पसंद करते हैं जिसमें ज्यादा पैसा बना सके.
  4. विशेष जाति या धर्म के लोगो को विशेष लाभ पहुँचाना

अंधभक्ति के ऐसे बहुत से कारण हैं जो समाज के विकास में बाधा बनते हैं और गरीबों या आर्थिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों तक सरकारी लाभ नही पहुँच पाती हैं.

राजनीती को बिज़नस समझना (Understanding politics as a business)

ज्यादातर युवा यह सोचते हैं कि राजनीति से अच्छा कोई बिज़नस नही हैं किसी अच्छे नेता से परिचय हो गया या कोई छोटा सा चुनाव जीत गया तो लाइफ सेट हैं इसलिए वो अपना महत्वपूर्ण समय राजनीति में देते हैं और बाद में पता चलता हैं राजनीति में तो कुछ हुआ नही और अब कुछ कर भी नही सकते हैं इसलिए जरूरी हैं. पहले खुद की आर्थिक स्थित मजबूत करे, अपनी योग्यता से समाज में कुछ नया करे इससे आपको अनुभव भी मिलेगा और मन को संतुलित करके अच्छे तरीके से राजनीति कर सकते हैं. कुछ लोगो दिखावा में बहुत सारा पैसा खर्च कर देते है और बाद में उन्हें कोई लाभ नही मिलता हैं और ऐसे लोग कभी-कभी मानसिक अवसाद के शिकार भी हो जाते हैं.

केवल भाषणों में ही विकास का होना (Speaking of country development only in speech)

भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी कमी यह हैं कि कोई कार्य वोट से प्रेरित होकर किया जाता हैं जबकि जो देश के लिए, गरीबों के लिए, महिलाओं के लिए, छात्रो के लिए, शिक्षा के लिए, स्वास्थ के लिए जरूरी हो, वही होना चाहिए. भाषण में कुछ कहते है और हकीकत में सरकारें कुछ और ही करती हैं. भारतीय नेता ज्यादातर वही वादा करते हैं जो दस साल में पूरा हो क्योकि इन्हें पता होता हैं अगली बार मौका मिलना ही नही हैं.

पारदर्शिता की कमी (Lack of transparency)

पारदर्शिता के कारण ज्यादातर भ्रष्ट नेता अधिक पैसा बनाते हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं ये वही नियम लाते हैं जिनमें इनका कोई नुक्सान न हो. लोकपाल का न लाना पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा करता हैं जो दल इसे लाने की वकालत करते थे आज वो भी इसे भूल चुके हैं. पारदर्शिता की कमी के वजह से ज्यादातर सरकारी अफसर भ्रष्ट होते हैं.

अपराधिक और सांप्रदायिक लोगो को राजनीति में ज्यादा महत्व मिलना (Criminal and communal people get more importance in politics)

भारतीय राजनीति की यह सबसे बड़ी कमजोरी हैं कि वोट और पैसे के चक्कर में अपराधिक और सांप्रदायिक लोगो को राजनीतिक पार्टी अपने में सामिल करना चाहती हैं ताकि उनका वोट बैंक बढ़े.

किसानो की समस्या का कोई हल न निकलना (No solution to the problem of farmers)

भारतीय राजनीति की यह सबसे बड़ी हार है कि आजादी के इतने दिन बाद भी किसानों की हालत बदतर हैं सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नही उठाया जाता हैं. हर पार्टी सत्ता में आने के बाद कुछ स्कीम लांच करके अपना पीठ थपथपा लेती हैं.

भारतीय राजनीति में बहुत सारी समस्याएं हैं यदि उनके बारे में बहुत विस्तृत बताना काफी कठिन हैं जरूरी हैं युवाओ का जागरूक होना और उनमे इतना साहस हो कि वो सही को सही और गलत को गलत कह सकते.