दिवाली के बारे में विशेष जानकारी

Diwali in Hindi

Diwali in Hindi – दिवाली या दीपावली एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार हैं. दीपावली को सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व दिया जाता हैं. यह त्यौहार अध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश का विजय को प्रदर्शित करता हैं. इस त्यौहार को लोग बड़े ख़ुशी और हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं. अलग-अलग धर्मो में इसको मनाने के अलग-अलग कारण हैं. कई दिनों पहले ही दिवाली की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं, लोगो अपने घरों, दुकानों और आस-पास के स्थानों की साफ़-सफाई का कार्य शुरू कर देते हैं. लोग घरों और दुकानों की रंगाई, सफ़ेदी और सजावट का कार्य करते हैं. बाजार में गलियों को, घर-मोहल्ले को सुनहरी दीप की लड़ियों से सजाते हैं. लोगो साफ़ सुथरे कपड़े पहनकर शाम को पटाखे जलाते हैं और मिठाई खाने का आनन्द लेते हैं.

दिवाली कब हैं? ( When is Diwali? )

दीपावली स्वच्छता और प्रकाश का पर्व हैं. भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती हैं और झूठ का नाश होता हैं और दिवाली में यही चरितार्थ होता हैं.
दिवाली – 19 अक्टूबर 2017 (बृहस्पतिवार)
दिवाली – 07 नवम्बर 2018 (बुधवार)
दिवाली – 27 अक्टूबर 2019 (रविवार)
दिवाली – 14 नवम्बर 2020 (शनिवार)

विभिन्न धर्मों के अनुसार दिवाली मनाने के कारण ( Reasons to celebrate Diwali according to various religions )

हिन्दू धर्म – दीपावली के दिन ही अयोध्या के राजा भगवान श्री रामचन्द्र जी अपने 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. अयोध्यावासियों के सबसे प्रिय राजा के आगमन से खुश एवं प्रसन्नचित थे और भगवान श्री रामचंद्र जी के स्वागत में पूरे नगर को घी के दीपक को जलाकर सजाया गया था. अमावस्या की वह काली रात्रि दीपों के प्रकाश से जगमगा उठी. तब से आज तक भारत में इस दिन को प्रकाश पर्व या दिवाली (दीपावली) के रूप में मनाया जाता हैं.

हिन्दू महाकाव्य महाभारत के अनुसार – ऐसा माना जाता हैं कि बारह वर्षो के वनवास व एक वर्ष के अज्ञातवास के बाद पांडवो की वापसी के प्रतीक के रूप में भी दीपावली मनाते हैं.

जैन धर्म – जैन धर्म के अनुसार इसी दिन चौबीसवें तीर्थकर “महावीर स्वामी” को मोक्ष की प्राप्ति हुई थे और इस दिन को मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं.

सिख धर्म – सिख समुदाय के इसे “बंदी छोड़ दिवस ( Bandi Chhor Diwas )” के रूप में मनाते हैं. इसी दिन सिक्खों के छठे गुरू “हरगोविंद सिंह जी” को जेल से रिहा किया गया था. इसी दिन 1577 में “स्वर्ण मंदिर” का शिलान्यास हुआ था.

नेपाल में दिवाली मनाने का मुख्य कारण – नेपाल में इसी दिन से “नेपाल संवत” में नया वर्ष शुरू होता हैं.

अध्यात्मिक महत्व – अज्ञान पर ज्ञान, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव हैं. जिस तरह लोग घर की साफ़-सफाई करते हैं और अन्धकार दूर करने के लिए प्रकाश का प्रयोग करते हैं उसी तरह हमें भी अपने अंदर की बुराई को ख़त्म करना चाहिए और अपने हृदय में ज्ञान रुपी दीप को जलाना चाहिए.

ऐतिहासिक महत्व – महर्षि दयानन्द ने भारतीय संस्कृति के महान जननायक बनकर दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया था.