सफ़ल लोगो की 7 आदतें

अत्यधिक प्रभावी लोगो की 7 आदतें (7 Habits of Highly Effective People) इस बुक के लेखक स्टीफन कोवे (Stephen Covey) हैं.  इस किताब में लेखक ने सफ़ल और प्रभावी लोगो के 7 आदतों के बारे में बताया हैं. व्यक्ति के जीवन में उसके व्यवहार ही उसको सफलता के उच्चतम शिखर पर पहुँचाता हैं.

  1. तैयार रहना(Be Proactive)
  2. अंतिम लक्ष्य को ध्यान में रख कर शुरुआत करें (Begin with the End in Mind)
  3. प्राथमिकता वाली बातें पहले करें (Put First Things First)
  4. समझने के लिए देखें, तो समझें (Seek to Understand, Then be understood)
  5. सोच में “जीत और केवल जीत” होनी चाहिए (Think Win/Win)
  6. तालमेल रखे (Synergize)
  7. आरी में धार लगाना (Sharpen the Saw)

इन्ही 7 आदतों पर पूरी किताब लिखी गयी हैं. जीवन में जो लोग सफ़ल होते हैं वो किसी तीसरी दुनिया से आये हुए लोग नही होते हैं. वो भी हम-तुम जैसे ही होते हैं. दो हाँथ, दो आख़, दो कान और एक दिमाग, अगर वो कर सकते हैं तो आप भी कर सकते हैं.

#1- तैयार रहना (Be Proactive)

अत्यधिक प्रभावी लोगो की 7 आदतों में से एक हैं “तैयार रहना या तत्पर रहना” इसका मतलब यह हैं कि हमें ज़िम्मेदार होना चाहिए.  पहली आदत उन लोगो में पाया जाता हैं जो जीवन में अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं.

प्रोएक्टिव को समझाने के लिए मैं नीचे कुछ पॉइंट्स दे रहा हूँ.

  • अपनी असफलता की जिम्मेदारी ले. (उदाहरण के लिए – क्रिकेट मैच हार जाने के बाद, हारने की जिम्मेदारी कप्तान लेता हैं और जीत के समय जीत पूरे टीम की होती हैं. ठीक उसी तरह हमें भी असफलता की जिमेदारी लेनी चाहिए और सफलता कर श्रेय सबको देना चाहिए.)
  • आप वही कार्य करे जो कर सकते हैं. दुसरो द्वारा उत्साहित होकर, भावुक होकर या उसके लाभ को देखकर न करे. आप अपनी क्षमता का आकलन करे और उसी अनुसार कार्य को चुने.
  • आप छोटे-छोटे लक्ष्य को बनाए (उदाहरण के लिए – यदि आप पढाई करते हैं तो यह फिक्स करे कि पूरे दिन में मुझे इतने घंटे पढ़ने हैं और इस दौरान मैं इस टॉपिक को ख़त्म करूंगा. यह एक दिन का लक्ष्य जब आप साल के अंत में देखेंगे तो आपके ख़ुशी का ठिकाना नही होगा)
  • यदि आपके जीवन में कोई समस्या हैं तो उसका हल केवल और केवल आपही ढूढ़ सकते हैं. स्वयं के बारे में ऐसी सोच होनी चाहिए.
  • वर्तमान में रहे, जो कर रहे हैं उसे पूरे मन से करे. यदि नही मन लग रहा हैं तो दूसरा विकल्प ढूढे. क्योकि “मछली कभी उड़ नही सकती और चिड़िया पानी में रह नही सकता “. सबकी अपनी-अपनी क्षमता होती हैं पर हुनर सबमे होता हैं. उसे पहचाने.

#2 – अंतिम लक्ष्य को ध्यान में रख कर शुरुआत करें (Begin with the End in Mind)

लक्ष्य अपनी योग्यता के अनुसार निर्धारित करे तभी इसका आरम्भ और अंत सुखद होगा

जब आप अपने लक्ष्य को चुने तो आपको पता होना चाहिए कि आप इसे कर सकते है या नही. आप जब आपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य आरम्भ करे तो उसे अंत तक करे.

भारतीय समाज में यह एक बड़ी विडंबना है कि लक्ष्य का चुनाव कैसे करे. एक व्यक्ति की आर्थिक, सामजिक स्थिति भी उसके लक्ष्य को प्रभावित करती हैं. यदि आपका लक्ष्य बड़ा हैं तो उसे छोटे-छोटे लक्ष्य में परिवर्तित करे और उसे प्राप्त करने की कोशिश करे. लक्ष्य को प्राप्त करने की एक समय-सीमा निर्धारित करे.

लक्ष्य निर्धारित करने के लिए – अपने से ज्यादा जानकार लोगो से बात करे. अपने मन में उठ रहे हर विचारो को उनके सामने रखे. आपको बहुत कुछ सिखने को मिलेगा. घर में अपने पेरेंट्स से सलाह ले.  आपको जहाँ से भी जानकारी मिल सकती हैं वहाँ से ले. सही जानकारी ले. अपनी कमजोरियों को न छुपाए उनको अपनी ताकत बनाए. उसके बाद जो आपका दिल-और-दिमाग लक्ष्य बनाए उसके पीछे लग जाए.

#3 – प्राथमिकता वाली बातें पहले करें (Put First Things First)

एक अच्छा जीवन जीने के लिए जरूरी हैं कि आप खुद के जरूरी कार्यो पर ध्यान दे. दूसरो से “ना, नही, नॉट” कहना सीखे. इस छोटे से जीवन में आप सारे कार्यो को नही कर सकते है.

जब हम स्टूडेंट होते हैं तो हमे समय का महत्व पता नही होता हैं. पढाई करते हैं पर हम अपना बहुत सारा समय व्यर्थ भी करते हैं. हमारे जीवन में तीन चीजे बहुत महत्वपूर्ण होती हैं जो हमारे साथ पूरे जीवन भर रहती हैं-

  • आचरण (ईमानदारी से व्यवहार करना )
  • स्वास्थ (स्वस्थ जीवन शैली)
  • शिक्षा (ज्ञान का अधिक-से -अधिक अर्जन)

ये तीनो गुण किसी भी व्यक्ति को सफल बना सकते हैं और इन तीनो गुणों को बनाए रखने के लिए आपको प्रतिदिन मेहनत करना पड़ेगा. इसलिए अपने समय को इन चीज़ो को बेहतर बनाने में लगाए.

#4 – सबसे पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ (Seek to Understand, Then be understood)

व्यक्ति के जीवन में कम्युनिकेशन स्किल (बात करने की कला) का होना बहुत जरूरी हैं. सिर्फ बात करना ही नही बात सुनने और दूसरो के विचारो को समझने की भी कला होनी चाहिए. जब हम कम्युनिकेशन की बात करते हैं तो हमारा तात्पर्य बोलने और सुनने दोनों से होता हैं. जो व्यक्ति किसी के बात को अच्छी तरह सुनेगा और समझेगा वही अच्छी तरह से उत्तर दे सकता हैं.

एक स्टूडेंट की सुनने और समझने की स्किल बेहतर होनी चाहिए क्योकि आप जब टीचर (गुरूजी) को अच्छे तरीके से सुनेगें तभी आप ज्ञान अर्जित कर सकते हैं. कई बार ऐसा होता है यदि दो व्यक्ति अपने विचारो को रख रहे हैं तो वो कुछ समय पश्चात् लड़ने लगते हैं क्योकि दोनों ही एक दुसरे को सुनते है पर समझते नही है इसलिए अच्छा कम्युनिकेशन स्किल का होना बहुत जरूरी हैं.

#5 – सोच में “जीत और केवल जीत” होनी चाहिए (Think Win/Win)

जब आप किसी कार्य को करे तो आपकी सोच सकारात्मक (Positive Thoughts) होनी चाहिए. यह लक्ष्य को प्राप्त करने में बहुत मदत करता हैं. सकारात्मक सोच शारीर को उर्जा प्रदान करता हैं. यदि हम वैज्ञानिक रूप से देखे तो भी इसके बहुत सारे लाभ हैं.

जब हम किसी कार्य को पॉजिटिव तरीके से करते हैं तो दूसरो को सहयोग भी करते हैं और उनसे जरूरत पड़ने पर सहयोग लेते भी हैं. सकारात्मक दिमाग अपने और दूसरो (दोस्त, भाई, पडोसी, देश, विश्व) सबका भला चाहता हैं. वह अपने लिए और समाज के लिए कुछ बेहतर करना चाहता हैं. एक अच्छी सोच आपको जीवन में महान बना सकती हैं. आपको एक सफल व्यक्ति बना सकती हैं.

#6- तालमेल रखे (Synergize)

किसी कार्य को जब एक टीम बना कर करते हैं तो वह ज्यादा ही बेहतर होता हैं. सरल शब्दों में समझे तो – “दो दिमाग एक दिमाग से बेहतर सोच सकते हैं”. जीवन में बहुत से ऐसे कार्य होते हैं जहाँ पर दो या दो से अधिक लोग ही उसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं तो उनमे तालमेल रखना बहुत जरूरी होता हैं.

#7 – आरी में धार लगाना (Sharpen the Saw)

इस पॉइंट को आप आसानी से इस उदाहरण से समझ सकते हैं यदि आप को एक पेड़ काटना हैं तो आपको दो चीज़ो की जरूरत होगी. एक धारदार कुल्हाड़ी और आपके हाथो में शक्ति जिससे आप उस पेड़ को काट सके. यदि कुल्हाड़ी की धार तेज न हो तो आप बहुत मेहनत करना पड़ेगा पेड़ काटने के लिए यदि शक्ति कम हैं तो भी आपको बहुत ज्यादा मेहनत करना पड़ेगा.

ठीक इसी तरह शिक्षा कुल्हाड़ी हैं आप अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करके इसे तेज करे. उस ज्ञान को आप सही तरीके से तब प्रयोग कर सकते हैं जब आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे इसलिए स्वस्थ होने भी बहुत जरूरी हैं. पढ़ हमारी समस्याए हैं.

नीचे दिए गये इन चारो विन्दुओ पर जरूर ध्यान दे.

  • शारीरिक (Physical)- उत्तम भोजन, व्यायाम या योग करना, आराम करना
  • सामजिक/भावनात्मक (Social Emotional) – दूसरो के साथ सामाजिक और अर्थपूर्ण सम्बन्ध बनाना.
  • मानसिक (Mental) – पढाई करना, सीखना-सिखाना,
  • आध्यात्मिक (Spiritual) – ध्यान करना, भक्ति भावना और प्रकृति से प्रेम

आपके मंगलमय जीवन की कामना करता हूँ ईश्वर आपको शक्ति दे कि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके.